Satya Darshan

लोस में सरकार ने स्वीकारा, दवाओं के मामले में भारत, चीन पर है निर्भर

नयी दिल्ली | जुलाई 11, 2019

दवाओं के कुल आयात का 67 प्रतिशत से ज्यादा माल चीन से आता है.  दवाओं के मामले में भारत हद से ज्यादा चीन पर निर्भर है.  जान लें कि केंद्र सरकार ने चीन पर दवाओं के मामले में इस निर्भरता को स्वीकार किया है. सरकार ने लोकसभा में नौ जुलाई को चीन से दवाओं और इसके कच्चे माल से जुडे़ आयात का ब्यौरा जारी किया है.

कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से सांसद डॉ उमेश जी माधव ने लोकसभा में सरकार से पूछा था कि क्या रसायन एवं उर्वरक मंत्री यह बतायेंगे कि देश में विभिन्न जरूरी दवाओं के लिए कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भरता है? यदि हां तो इसके क्या कारण हैं. सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या उपाय करने की योजना बना रही है.

आयातित बल्क ड्रग्स में चीन का हिस्सा लगभग 67 प्रतिशत

अपने जवाब में  रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने बताया कि दवाओं के मामले में देश की चीन पर निर्भरता है. इस क्रम में उन्होंने चीन से दवाओं के आयात के आंकड़ों की जानकारी दी.  जिसके अनुसार 2016-17 में कुल आयात 2738.46 मिलियन डालर  हुआ. जिसमें से 66.69 प्रतिशत यानी 1826.34 डॉलर सिर्फ चीन से  हुआ.

इसी तरह 2017-18 में कुल 2993.25 की तुलना में 2055.94 मिलियन डॉलर यानी 68.68 प्रतिशत आयात हुआ. जबकि 2018-16 में जहां कुल आयात 3560.35 मिलियन डॉलर रहा, उसमें से अकेले चीन से 67.56 प्रतिशत यानी 2405.42 प्रतिशत का भारत ने आयात किया.

डीजीसीआईएस, कोलकाता के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 के दौरान, देश में आयातित बल्क ड्रग्स में चीन का हिस्सा लगभग 67 प्रतिशत है. रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने बताया कि देश कुछ जरूरी दवाइयों सहित अन्य दवाइयों को बनाने लिए ड्रग्स/एक्टिव फार्मास्यूटिकल अवयव यानी एपीआई का आयात होता है.

रसायन एवं उर्वरक मंत्री के अनुसार  सरकार भारतीय फार्मा उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाकर शुरू से अंत तक स्वदेशी दवा विनिर्माण में भारत को पर्याप्त आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार की ओर से समय-समय पर नीतियां बनाकर आयात पर देश की निर्भरता कम करने और स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम चल रहा है.

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