Satya Darshan

ग्रीन प्लास्टिक: गोमूत्र से नहीं बांग्लादेश ने बनाया जूट से 'सोना'

सरोकार | जुलाई 29, 2019

दुनिया भर के देश प्लास्टिक के थैलों को घटाने के लिए मुहिम चला रहे हैं. यह बांग्लादेश के लिए एक बड़े मुनाफे का कारोबार बन सकता है. यहां बनने वाले जूट के थैले प्लास्टिक का उपयोग कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

भारत के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा जूट बांग्लादेश में पैदा होता है. गोल्डेन फाइबर के नाम से विख्यात इन रेशों की कीमत भी कभी बहुत ज्यादा हुआ करती थी लेकिन समय के साथ मांग घटी तो उसकी चमक फीकी पड़ गई. इधर गोमूत्र से सोना निकालने के शिगूफे के बीच एक बांग्लादेशी वैज्ञानिक ने जूट के रेशों को कम कीमत में जैविक रूप से अपघटित होने वाले सेल्यूलोज की शीट में बदलने का तरीका ढूंढ निकाला है. इसका फायदा यह है कि दिखने में यह प्लास्टिक जैसा होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल और आसानी से नष्ट होने वाला होगा एवं कारोबारी तौर पर बांग्लादेश के लिए सोना उगलने की मशीन साबित होगा.

बांग्लादेश की सरकारी जूट मिल्स कॉर्पोरेशन (बीजेएमसी) के वैज्ञानिक सलाहकार और जूट के नए बैग बनाने वाली टीम के मुखिया मुबारक अहद खान का कहना है, "इसके भौतिक गुण लगभग एक जैसे ही हैं." उनका कहना है कि ये थैले तीन महीने मिट्टी में दबा कर रखने के बाद पूरी तरह से अपघटित हो जाते हैं और इन्हें रिसाइकिल भी किया जा सकता है. बांग्लादेश अब प्रायोगिक तौर पर हर दिन 2000 थैले बना रहा है हालांकि इसके कारोबारी उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की योजना है. इसके लिए एक विदेशी कंपनी से करार भी हो गया है.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इसी साल मार्च में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे लोगों से "गोल्डेन बैग के व्यापक इस्तेमाल को तेज करने में मदद" का अनुरोध किया था. अप्रैल में सरकार ने बांग्लादेश के क्लाइमेट चेंज ट्रस्ट फंड से 9 लाख डॉलर धन भी मुहैया कराया ताकि इन थैलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो सके. बीजेएमसी के जेनरल मैनेजर ममनूर राशिद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "एक बार प्रोजेक्ट पूरी तरह से चलने लगा तो हम सोनाली बैग को छह महीने के भीतर कारोबारी रूप से बनाने की उम्मीद कर रहे हैं."

भारी मांग

बांग्लादेश दुनिया के उन पहले देशों में है जिसने प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाई. 2002 में यह काम स्थानीय जलमार्गों में जमा होने वाली प्लास्टिक को रोकने के लिए किया गया. हालांकि तब इस रोक को बहुत कामयाबी नहीं मिली थी. आज भी बांग्लादेश की राजाधानी ढाका में हर महीने करीब 41 करोड़ प्लास्टिक थैले उपयोग में लाए जा रहे हैं. बूढ़ी गंगा नदी में तीन मीटर की गहराई तक प्लास्टिक कचरे की परत जमा हो गई है.

60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक की थैली के इस्तेमाल पर रोक है. फ्रांस से लेकर चीन तक ने कुछ इलाकों में ही सही यह रोक जरूर लगाई है. बांग्लादेश में प्लास्टिक की थैली पर रोक का विस्तार होने के बाद 100 से ज्यादा बांग्लादेशी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने नए जूट वाले बैग का इस्तेमाल करने की बात कही है. 

मुबारक अहमद खान बताते हैं, "हर दिन मुझे अलग अलग देशों के खरीदारों से ईमेल और फोन कॉल आ रहे हैं."

इनमें ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, जापान और फ्रांस जैसे देश शामिल हैं. उम्मीद की जा रही है कि हर महीने कम से कम एक करोड़ थैले का निर्यात होगा. कारोबारी तौर पर थैले का उत्पादन इस साल के आखिर तक शुरू हो जाएगा. मुबारक अहमद खान का कहना है कि अगर बांग्लादेश के सारे जूट उत्पादन को इन थैलों के निर्माण में लगा दिया जाए तो भी मांग का एक तिहाई ही पूरा हो सकेगा. 

(आंशिक इनपुट रॉयटर्स से)

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